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चीन में मुसलमान कैसे मनाते हैं ईद अल-अज़हा त्योहार।।

  1. वज्रपात न्यूज:-

इस वर्ष 10 जुलाई को चीनी मुसलमानों का भव्य त्योहार ईद अल-अज़हा है। यह त्योहार इस्लाम धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक है। चीनी मुसलमान ईद अल-अज़हा को “वफादारी और आज्ञाकारिता वाला त्योहार” कहते हैं। चीनी मुसलमान ईद अल-अज़हा त्योहार को बहुत महत्व देते हैं, त्योहार के दिन लोग शानदार कपड़े पहनकर मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ते हैं, पूर्वजों को याद करते हैं और दावत आयोजित कर मेहमानों का सत्कार करते हैं।

वर्तमान में चीन में इस्लाम को मानने वाली 10 अल्पसंख्यक जातियां ईद अल-अज़हा त्योहार मनाती हैं, जिनमें हुई जाति, उइगुर जाति, कज़ाख जाति, उज़्बेक जाति, ताजिक जाति, तातार जाति, किर्गिज़ जाति, साला जाति, तोंगश्यांग जाति और पाओआन जाति शामिल हैं।
ईद अल-अज़हा त्योहार के दिन सुबह उइगुर जाति के मुसलमान स्नान कर अच्छी पोशाक पहनकर नमाज में शामिल होने के लिए मस्जिद जाते हैं। चाहे शहर में हो या गांव में, लोग मैदान में गायन और नृत्य सभा में भाग लेते हैं।
उधर, कज़ाख, किर्गिज़, ताजिक, उज़्बेक आदि जातियां ईद अल-अज़हा त्योहार के दौरान भेड़ पकड़ने, घुड़दौड़, कुश्ती जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करती हैं।
त्योहार के कुछ दिन पहले, तातार जाति के हर परिवार अपने-अपने मकान की सफाई करते हैं, लोग त्योहार मनाने के लिए विभिन्न प्रकार के केक और खाद्य पदार्थ बनाते है। त्योहार के दिन 18 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष नमाज में शामिल होने के लिए मस्जिद जाते हैं, इसके बाद प्रत्येक घर में भेड़ों का वध करना और बलि देने की रस्म आयोजित करना शुरू हो जाता है। वयस्क और बच्चे, पुरुष और महिलाएं, युवा और बूढ़े नए कपड़े पहनकर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां जाते हैं।
उधर, साला जाति के लोग ईद अल-अज़हा त्योहार के दिन मटन पकाने, मिठाई और केक बनाने के बाद मेहमानों का सत्कार करते हैं। नमाज पढ़ने के बाद लोग एक दूसरे से मिलते हैं और बकरियों की कुर्बानी देकर एक दूसरे को स्मृति के लिए भेंट करते हैं। त्योहार के दौरान, बकरियों का वध करने वाले लोगों को कम से कम एक चौथाई मांस उन लोगों को देना होता है जो भेड़ का वध करने में असमर्थ हैं। ईद अल-अज़हा त्योहार लोगों के बीच संबंध और भावना को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उधर, तोंगश्यांग जाति के लोग त्योहार के सुबह मकान की सफाई करते हैं, युवा स्नान करके नमाज के लिए मस्जिद जाते हैं। समारोह के बाद बलिदान समारोह आयोजित किया जाता है। वध किए जाने वाला मांस तीन भागों में बांटा जाता है, एक भाग को खुद खाने के लिए, दूसरे भाग को रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को घर में सत्कार करने के लिए और तीसरे भाग को मस्जिद भेजने या गरीब लोगों की सहायता के लिए उपयोग किया जाता है।
वहीं, पाओआन जाति के लोग त्योहार के पूर्व हर परिवार में योश्यांग, सानज़ी, क्वोक्वो आदि खाना पकाते हैं। त्योहार के दिन सुबह पुरुष स्नान करके मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ते हैं, और त्योहार के दौरान पुरुष, महिलाएं, बूढ़े और छोटे सब लोग नई पोशाक पहनकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं।

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