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हम तो पूछेंगे, सच सबसे आगे।।

जिले में हो रहा विभिन्न मछलियों के स्पॉन, सीडलिंग, अंडा, जीरा का प्रोडक्शन।

वज्रपात न्यूज:-

कल्चर्ड बड़ी मछलियों का भी हो रहाजिले में प्रोडक्शन।

फिश प्रोडक्शन में जिले को बनाएं आत्मनिर्भर : जिलाधिकारी।

प्रयास ऐसा करें कि पश्चिम चम्पारण जिले से फिश प्रोडक्शन होकर निर्यात किया जा सके।

किसानों को होगा लाभ, लोगों को मिलेगा रोजगार।

जिलाधिकारी ने किया मिश्रा मत्स्य विकास हैचरी, पिपरा का निरीक्षण।

अर्नामेंटल फिश प्रोडक्शन, सोलर पम्पिंग सेट का उपयोग एवं फिड प्रोडक्शन करने का निदेश।

फिश प्रोडक्शन के क्षेत्र में जिले को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कार्ययोजना बनाकर तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। जिले के विभिन्न जगहों पर किसानों को प्रोत्साहित, आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए फिश हैचरी का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में विभिन्न मछलियों के स्पॉन, सीडलिंग, अंडा, जीरा का प्रोडक्शन भी हो रहा है। इसके साथ ही कल्चर्ड बड़ी मछलियों का भी प्रोडक्शन किया जा रहा है। सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा जिले को मछली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृत संकल्पित है।

इसी क्रम में जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार द्वारा आज मिश्रा मत्स्य विकास हैचरी, पिपरा का निरीक्षण किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि अधिकारियों एवं मत्स्य पालकों से कहा कि प्रयास ऐसा करें कि पश्चिम चम्पारण जिले में मांग के अनुरूप फिश प्रोडक्शन होकर आपूर्ति किया जा सके।

निरीक्षण के क्रम में मिश्रा मत्स्य विकास हैचरी के प्रबंधक द्वारा बताया गया कि बायोफ्लाक तकनीक अधिष्ठापन के लिए उसे सरकार से लागत मूल्य मो0 आठ लाख पचास हजार रूपए का 50 प्रतिशत सब्सीडी के रूप में प्राप्त हुआ है। सरकार द्वारा आर्थिक सहायत दिए जाने की बदौलत आज सीडलिंग, जीरा एवं बड़े मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे अत्यधिक मुनाफा भी मिल रहा है। साथ ही जिले में मछली के खपत के अनुरूप पूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बिहार राज्य के अन्य जिलों जैसे कैमूर, गया, मोतिहारी इत्यादि जगहों पर भी अधिक मात्रा में सप्लाई की जा रही है। उन्होंने बताया गया कि वर्तमान में रेहू, नैनी एवं कतला मछली के स्पॉन भी यहीं तैयार हो रहे हैं तथा बड़े मछली भी यहीं कल्चर करके निर्यात किए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी द्वारा सिडलींग से लेकर फिश प्रोडक्शन तक की बारीक जानकारी प्राप्त की गई एवं प्रबंधक का उत्साहवर्धन करते हुए इसे व्यापक पैमाने पर करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने प्रबंधक से नवीन तकनीक आधारित फिश प्रोडक्शन करने का भी सुझाव दिया। साथ ही उर्जा की खपत करने एवं लागत कम करने हेतु सौर उर्जा आधारित पम्पींग सेट का उपयोग करने का सुझाव दिया गया।

जिला मत्स्य पदाधिकारी को निदेश दिया गया कि वे इस प्रकार के अन्य फिश हैचरी का निर्माण कराने के निमित्त किसानों को जागरूक एवं प्रेरित करें तथा इच्छुक किसानों की लिस्टिंग करते हुए उन्हें सरकार के द्वारा दिए जाने वाली सुविधाओं को मुहैया कराते हुए अधिक से अधिक फिश प्रोडक्शन कराएं। साथ ही किसानों को अच्छे तरीके से प्रशिक्षित कराना सुनिश्चित करें। इस हेतु जिले में विकसित फिश हैचरी का अध्ययन कराएं।

जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि ऑर्नामेंटल फिश का उत्पादन इसी जिले में हो, इसके लिए टारगेटेड बेस्ड कार्ययोजना तैयार करते हुए क्रियान्वयन कराएं। उन्होंने कहा कि फिश प्रोडक्शन के लिए चंवर काफी अनुकूल होता है, इसके विकास के लिए जिले के विभिन्न जगहों पर कलस्टर तैयार कराएं तथा उन्हें प्रशिक्षण दिलाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि फिड प्रोडक्शन भी इसी जिले में प्रारम्भ हो सके, इसके लिए भी किसानों को प्रेरित करें एवं आवश्यक कार्रवाई करें।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री अनिल कुमार, एएसडीएम श्री अनिल कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, श्री गणेश राम, सहायक निदेशक, उद्यान श्री विवेक भारती सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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